सत्य वचन कह कर तुमने
क्या नवीन निर्माण किया
जो था धरा पर इसी जगह
उसका ही तो बखान किया
है सृजन झूठ में जितना
सत्य कहाँ उसे पायेगा
नित नवीन सृष्टि के दर्शन
सत्य कहा दिखलायेगा
असत्य बोलना ही तो सृजन हैं
असत्य बिन कहाँ परिवर्तन है
सृष्टि सत्य की रहे यथावत
असत्य क्रमिक विकास की गाथा
एक झूठ सौ झूठ बनाये
सत्य कहाँ इतना चंचल है
बाते अक्सर सत्य बिगाड़े
झूठ मुफ्त बदनाम हुआ
झूठ भरोसे दुनिया चलती
सत्य कहाँ इतना संबल है
झूठ सफलता की कुंजी
आख खोल जग तो देखो
विपदाओ के सर्द सत्य में
झूठ बना हुआ कम्बल है
झूठ तुम्हारा मरते दम तक
संग तुम्हारे लड़ता है
सत्य कहाँ इतना बलशाली
अक्सर धोखा देता है
झूठ बोलना भी एक कला है
सत्य कोई भी बक सकता है
आखो देखा हाल सुनना
कोई चैनल कर सकता है
जो नहीं भुवन में हुआ आज तक
झूठ उसे भी ला सकता है
सत्य ईश की निर्मित रचना
को ही तो बतला सकता है
दोषयुक्त इस सत्य विश्व में
झूठ बोलना ही वैभव है
आओ अपना विश्व रचे
ये झूठ झूठ में संभव है
krit-kritarth karti hui lines hai aapki..
ReplyDeleteadbhut vishay par adbhut tark..
Jai Ho
Maan gaye swami.
ReplyDeleteGajab likhha hai.